Thursday, December 4, 2014

मसाले भी हैं सेहत के रखवाले

वैद्य j p yadav

प्रकृति ने हमें अनेक बहुमूल्य जड़ी-बूटियाँ एवं मसाले उत्तम स्वास्थ्य के लिए उपहार में दिए हैं। मसालों को सामान्यतया: स्वास्थ्यवर्धक एवं पाचक माना जाता है। अतः मसालों एवं जड़ी-बूटियों का एक फर्स्ट एड बॉक्स बनाकर हम घरेलू उपचार में प्रयोग कर सकते हैं। ठीक वैसे ही जैसे हमारी दादी-नानी करती हैं।

* हल्दी : आयुर्वेद के अनुसार हल्दी ऊष्ण, सौंदर्य बढ़ाने वाली, रक्तशोधक, कफ वात नाशक आदि होती है। सर्दी-खाँसी में गरम पानी से हल्दी की फँकी देने से आराम मिलता है तथा बलगम भी निकल जाता है। हल्दी एंटीबायटिक का काम भी करती है। इसे फेस पैक के रूप में बेसन के साथ लगाने से त्वचा में निखार आता है।

* अदरक : यह पाचक है। पेट में कब्ज, गैस बनना, वमन, खाँसी, कफ, जुखाम आदि में इसे काम में लाया जाता है। अदरक का रस और शहद मिलाकर चाटते रहने से दमे में आराम मिलता है, साथ ही भूख भी बढ़ती है। यह पाचन ठीक करता है। नीबू-नमक से बना सूखा अदरक आप यात्रा में साथ रख सकते हैं।

* मैथीदाना : मैथीदाना खून को पतला करता है, मल को बाँधता है। मधुमेह रोगी के लिए मैथीदाना रामबाण औषधि है। नित्य खाली पेट एक चम्मच मैथी दाने का चूर्ण पानी के साथ लेने से कब्ज व घुटने के दर्द में आराम मिलता है। साथ ही यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी छाँटने में भी कारगर है। सर्दियों में यह बेहद फायदा करता है।

* जीरा : जीरा पाचक और सुगंधित है। खाने में अरुचि, पेट फूलना, अपच आदि को दूर करता है। जीरा, अजवाइन पीसकर थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर भोजन के बाद लेने से पाचन ठीक रहता है। उल्टी की शिकायत भी बंद हो जाती है। जीरा कृमिनाशक एवं ज्वर निवारक भी है।

* सौंफ : सौंफ शीतल प्रकृति की औषधि है। भोजन के बाद मुखशुद्धि में इसका प्रयोग होता है। गर्मी में ठंडाई में डाली जाती है। भूनी हुई सौंफ और मिश्री समान मात्रा में पीसकर हर दो घंटे बाद ठंडे पानी के साथ फँकी लेने से मरोड़दार दस्त, आँव और पेचिश में लाभ होता है। यह कब्ज को दूर करती है। बादाम, सौंफ और मिश्री तीनों बराबर भागों में लेकर पीसकर भर दें और रोज दोनों टाइम भोजन के बाद एक चम्मच लें। इससे स्मरणशक्ति भी बढ़ती है।
      वैद्य एस0के0 यादव

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